Have U got a chance to witness the BEAUTIFUL SHALIGRAM ie शालिग्राम before…
V at DIVINEE ASSTITVA present the BEAUTIFUL, ADORABLE & ADMIRABLE… SHALIGRAM ie शालिग्राम
Natural SHALIGRAM ie शालिग्राम is only available in the Kali Gandaki River of the valley of Mustang district in Nepal which is the biggest tributary of GANGES. Damodar Kund region of Kali Gandaki river is the actual point of seeing Shaligram ie शालिग्राम
the real SHALIGRAM ie शालिग्राम holds high worth than any other expensive material i.e gold, silver… Water having just stroked the genuine Shaligram will transform into Amrit and it has the ability to cure any kind of illness & negative aspect from an individuals…
As per SKANDA puran ie स्कन्द पुराण … People who consume holy nectar of Genuine Saligram will get rid of all Sins. Anyone who sees, pays respect, bath & worship Shaligram stone will be blessed by the Lord Vishnu and get the blessings of giving 10 million cows in donations.
It was the SHALIGRAM ie शालिग्राम who is married to TULSI ji…The one that V present U has the NATURAL gold line on it, making it highly auspicious with the complete set…
क्या आपको खूबसूरत शालिग्राम देखने का मौका मिला है?
V at DIVINEE ASSTITVA present सुंदर, मनमोहक और प्रशंसनीय … शालिग्राम
प्राकृतिक शालीग्राम केवल नेपाल में MUSTANG District के काली गंडकी नदी की घाटी में उपलब्ध है जो गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है। काली गंडकी नदी का दामोदर कुंड क्षेत्र है शालिग्राम के दर्शन का वास्तविक स्थल…
शालिग्राम ही थे जिनका विवाह तुलसी जी से हुआ
जो हम आपको प्रस्तुत करते हैं उस पर प्राकृतिक सोने की रेखा है, जो इसे पूर्ण सेट के साथ अत्यधिक शुभ बनाती है…
श्री शालिग्राम की उत्पत्ति…
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसको हम देवोत्थान एकादशी भी बोलते हैं को जब श्री हरि विष्णु चार माह की निद्रा से जागते हैं तो उनके विग्रह स्वरूप शालीग्राम और देवी तुलसी का विवाह किया जाता है।
पौराणिक कथा है भगवान विष्णु और उनकी परम भक्त देवी वृंदा कि, जिन्होंने जालंधर नमक राक्षस जो स्वयं महादेव का अंश भी था और अपने अहंकार में उसने महादेव को भी युद्ध कि चुनौती दे दिया था. महादेव जानते थे कि उसकी शक्ति देवी वृंदा कि सतित्वता है और उसको सिर्फ भवन विष्णु ही तोड़ सकते हैं …
भगवन विष्णु ने वैसा ही किया और जालंधर का वध महादेव ने कर दिया, किन्तु जब वृंदा को पता चला तो वह भगवन विष्णु को अपने प्रश्नो से निरुत्तर कर दिया और तभी श्राप दिया कि वह निर्जीव पत्थर बन जाएँ. लष्मी एवं देवताओ के विनती से वृंदा ने श्राप तो वापस लिया किन्तु जालंधर के सर के साथ सटी हो गयीं. उसी राख से जो पौधा उपजा वह तुलसी कहलाया और श्री हरी ने अपने पत्थर स्वरुप से तुलसी जी से विवाह किया, जो पत्तर शालिग्राम कहलाया …












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